Hindi Quote in Poem by Vandna Sharma

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-- खिचड़ी की राम कथा
हास्य कविता

एक विदेशी आया घूमने यू पी
देख हमारा यूपी हुआ गदगद
पहुँचा एक मित्र के यहाँ
बनी थी जहाँ भोजन में खिचड़ी

भा गई उसे बहुत , बोला
क्या नाम है इसका, इसमें स्वाद बड़ा
सुनकर नाम, खुशी से बोला खिचड़ी
यही रटता जा रहा था रास्ते में
खिचड़ी खिचड़ी खिचड़ी

लगी ठोकर गिरा नीचे
जब तक सँभला नाम भूला
रटने लगा अब नया मिसरा
खा चिड़ी, खा चिड़ी, खा चिड़ी

मिला राह में एक ग्रामीण
उड़ा रहा अपनी फसलो से चिड़िया
दिया पीट उसे कसकर, बोला
उड़ चिड़ी, उड़ चिड़ी रटा कर
उड़ चिड़ी, करता जो आगे बढ़ा

एक शिकारी ने धो डाला
जो बैठा था जाल बिछाए
उसे कुछ ना समझ आया, बोला शिकारी
आते जाओ फँसते जाओ
यही अब रटते जाओ

बेचारा यात्री यही रटता
जा रहा था

कुछ दूर ही चला था,
कुछ चोरों ने पीटा बहुत बोले
लाते जाओ रखते जाओ
ऐसा बोलो चलते जाओ
घबराया यात्री | यही लगा रटने

दूसरे गाँव पहुँचा ही था मिली एक अर्थी रास्ते में
वहाँ ग्रामीणों ने धो डाला
क्या दिमाग नहीं है लाला
कुछ तो अच्छा बोलो, सोच समझकर मुँह खोलो
बोलो ऐसा किसी का ना हो

ऐसा किसी का ना हो रटे जा रहा था
सामने से आई बारात,
बारात ने धो डाला, बड़ा मारा
बोला, ऐसा सबका हो, ऐसा सबका हो
ऐसा सबका हो कहते-कहते पहुँचा
अगले गाँव जहाँ लगी थी
एक झोपड़ में आग, वहाँ भी
लोगों ने उसका बजाया बाजा

बेचारा रोते-रोते पहुँचा घर
पिट-पिट कर हुआ बेहाल
लगी थी भूख जोरों की
जैसी ही उसके बच्चे ने पूछा
क्या खाओगे, सारा गुस्सा उगला उस पर
ये मारा वो मारा, देखकर उसके
ऐसे ढंग देखी बोली बीबी
क्या खिचड़ी बनाओगे बच्चे की

खुशी से दो फुट उछला
चिल्लाया हाँ याद आया
खाऊँगा मैं खिचड़ी
खिचड़ी की राम कथा सम्पूर्ण
तो बोलो जय श्री राम |

---dr वंदना शर्मा पांडव नगर new delhi

Hindi Poem by Vandna Sharma : 112028291
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