प्रेमकविता : एकतरफा मोहब्बत
इस गली के शोर में चुपके से देख रही हूँ मैं तुझे,
खामोश होकर मन ही मन मुस्कुरा रही हूँ दिल में,
अंजान लगूँ मैं तुझे, पर अंजान नहीं तू मुझे,
बस चाहती हूँ इस इर्द-गिर्द माहौल में देखे तू सिर्फ मुझे,
मैं तेरे आसपास ही हूँ, पर तू देख रहा है कहीं दूर...