तमाम रास्ता सुनसान नजर आया
सफर अपना बड़ा तन्हा नजर आया
इंसान लगे हुबाब की तरह
फुटा जो न फिर नजर आया
मैं कल का मतलब समझ चुका हूँ आज
रास्ते में जर्जर खण्डर जो नजर आया
डर रहा हूँ जमीं पे पड़े हर पत्थर से
खुद में जो एक पागल नजर आया
मैंने कोशा है चारागर अपना
जख्म अपना जब नासुर नजर आया