ऐ लुगाई ' तू दे दे रजाई . ठंड है मुझ को है सताई ।
तेरे बिना दूर कैसे हो तन्हाई ' पास तो आ मेरे बच्चो
की माई
चाहे तू लेले मेरी सारी कमाई आ मेरी बाँहो मे समाई
तुझ मे लिपट कर सुकून की नींद आई ' तू चैन मेरे दिल का किसी न बतलाई
तू है हर मर्ज की दबाई तेरे कदमों मे जनन्त सारी बिछाई
इतनी खूबसूरत तुझे किसने बनाई सारी ममता तुझमे समाई
तूने मेरे घर की शोभा बढ़ाई तेरे बिना मैं कुछ भी नही ' तूने ही मेरी दुनिया बनाई ।
- Nandini Agarwal Apne Kalam Sein