आज तुम बहुत याद आ रही हो।
हां, रोज़ याद आती हो,
पर आज कुछ ज़्यादा आ रही हो।
मैंने हर उस शख़्स को बदलते देखा है
जिसके ना बदल जाने का गुमान था मुझे।
पर ऐसे वक़्त में तुम्हारा असीमित प्रेम बहुत याद आता है।
कुछ लोग कहते हैं “उदास होती हो तो इतना क्यों याद करती हो उन्हें?”
अब कैसे बताऊँ कि एक तुम ही तो थी मेरे पास
जो मुझमें लाख बुराइयाँ होने के बावजूद मुझसे अनंत प्रेम करती रही।
हर किसी को नापसंद रहने वाली लड़की से तुम ही तो मुस्कुराकर बात किया करती थी।
तुम ही तो थी जो मेरे गुस्से के पीछे छुपी फ़िक्र पढ़ लेती थी।
जब पूरी दुनिया मुझे गलत समझ लेती थी, तब भी तुम मेरे हिस्से की सफ़ाई अपने दिल में बचाकर रखती थी।
एक तुम ही तो थी जिसको फिक्र थी मेरी देर रात लगने वाली भूख की।
एक तुम ही तो थी जो कहती थी कि अब सो जा बहुत थक गई है।
तुम ही तो थी जो मेरे चिड़चिड़े मिजाज को झेल लेती थी इतनी सहजता से।
एक तुम ही तो थी जिसके सामने मुझे अच्छा बनने का अभिनय नहीं करना पड़ता था , मैं जैसी थी,तुमने वैसे ही अपना लिया था मुझे।
तुम ही तो समझती थी कि तुम्हारे जाने के बाद
मैं कितनी टूट जाऊँगी।
अगर ये सच नहीं है,केवल मेरा भ्रम है,
तो मैं डरती हूं…
इस भ्रम के टूट जाने से भी।