हर दिन के बाद एक रात सुहानी आती हैं,
पर उस रात में तुम्हारी यादें रुलाने आती हैं,
वैसे तो दिन भर की थकान नींदें ले ही आती हैं,
मगर तुम्हारी यादें पल भर भी सोने नहीं देती हैं,
ज़िंदगी रोज़ खुदकुशी की कईं कोशिशें करती हैं,
मगर मौत हैं कि मुस्कुराकर पास से गुजर जाती हैं,
बड़ी बेशर्म हैं जान जो मेरे जिस्म को छोड़ती नहीं हैं,
जीते जी मर गए हैं मगर धड़कनें है कि थमती नहीं हैं,
✍️PARTH SOLANKI✍️