नींद✨
तुम सो रही हों, पर मैं नहीं।
मन तो हैं कि मैं तुमको जगा दूं ,
पर जगाऊंगा नहीं।
मुझे पता है तुम बोलोगे कुछ नहीं,
पर मैं तुमसे तुम्हारा निंद्रा का अधिकार छीनूंगा तो नहीं।
हा तुमने मुझे अधिकार दिए हैं तो सही,
पर मैं उन्हें संभाल पाऊं तो सही,
मेरा मन जूझ रहा हैं तुम्हारी यादों से,
यादें तो कहती हैं जगा दूं तुम्हे, पर विवेक नहीं।
जगाऊंगा तो यादें विजय होगी, पर अधिकार का अर्थ ये तो नहीं।
अंततः नहीं जगाता हूँ।
सोओगे जब तुम विवेक से, तब अधिकार मात्र जगाना होगा।
जब जाओगे तुम दूर खुद से, तब अधिकार मात्र लौटाना होगा।
-यथार्थ