✨ शांति का आह्वान
मैं आज शांत महसूस कर रहा हूँ—
क्या सच में शांत हूँ?
या यह मात्र परिवेश का प्रभाव है?
परिवेश कुछ भी हो,
अंततः तुम मुझे शांत कर देते हो।
प्रतिदिन तुम मुझे खींचते हो,
या कदाचित मेरी आंतरिक बेचैनी तुम्हें।
खींचाव किसी भी तरफ़ से हो,
परिणाम मात्र एक —
मैं तुम्हारे पास पहुँच जाता हूँ।
और तुम्हारे पास होना
अर्थात—अपने पास लौट आना।
तुममें ऐसा क्या है?
पेड़, पौधे, फूल, हवा—
सामान्य दिखते हुए भी
मुझे मेरे भीतर उतार देते हो।
क्या तुम केवल इतने भर हो?
या यह हमारे बीच की एकता का संकेत है?
तुम साधारण नहीं हो—
यदि होते, तो यूँ प्रेम न करते।
मैं अनुभव करता हूँ कि तुम मेरे हो।
क्या तुम भी? शायद हाँ।
मेरी अनुभूति कहती है—
मैं तुमसे पृथक नहीं हूँ।
मेरी शांति संकेत है
कि मैं तुम हूँ और तुम मैं।
मैं तुम्हारी गोद में सो जाना चाहता हूँ।
मैं तुम्हारी अनंत शांति में खो जाना चाहता हूँ।
समय पुकार रहा है—
मैं फिर उससे जुड़ जाऊँगा।
पर मैं वादा करता हूँ,
मैं फिर लौट कर आऊँगा।
और एक दिन—सदा के लिए
मैं तुम्हारा हो जाऊँगा।
तुम्हारा… तुम्हारा…
सिर्फ़ तुम्हारा।
~ यथार्थ