सच्चा मित्र
तुम नमक नहीं, चंदन हो,
मेरे जीवन का मधुर स्पंदन हो।
जब-जब मन में पीड़ा आती है,
तुम्हारी बातों से ठंडक छा जाती है।
दुनिया अक्सर घाव बढ़ा देती है,
दर्द पर नमक छिड़क जाती है।
पर तुम चंदन बनकर आते हो,
हर पीड़ा को शीतल कर जाते हो।
जब राहें धुंधली हो जाती हैं,
और उम्मीदें भी सो जाती हैं,
तब तुम दीपक बनकर जलते हो,
अंधेरों में रास्ता दिखाते हो।
सच्चा मित्र वही कहलाता है,
जो हर दुख में साथ निभाता है।
जो गिरने पर हाथ बढ़ाता है,
और हिम्मत भी दे जाता है।
तुम नमक नहीं, चंदन हो,
जीवन का सुंदर बंधन हो।
घावों को भरने के साथ-साथ,
मन को शीतल करने का कारण हो। 🌸