Hindi Quote in Poem by Manali

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घर बनते-बनते बस एक मकाँ बनकर रह गया,
दिल जो था सुकूँ का, वो वीराँ बनकर रह गया।
एक ख़्वाब था जो आँखों में रौशन-सा ठहरा था,
वक़्त की सियाही में वो गुमाँ बनकर रह गया।
एक आरज़ू ने साँसों से उम्र उधार माँगी थी,
छूते ही हक़ीक़त को, बे-जाँ बनकर रह गया।
लबों पे जो तबस्सुम था, क़र्ज़-ए-लम्हा निकला,
हर इक हँसी अब एक इम्तिहाँ बनकर रह गया।
नज़र में जिसकी तलाश थी, वो भी खो गई कहीं,
दिल से तेरा नाम भी निहाँ बनकर रह गया।
उँगलियाँ जो थामें थीं कभी किसी की हथेली,
आज हर वो रिश्ता बे-निशाँ बनकर रह गया।
कलाई पे लिखा वो धुँधला-सा इश्क़ का हरफ़,
वक़्त की स्याही में वो कहाँ बनकर रह गया।
हमसफ़र जो छूटा तो सफ़र रूठ-सा गया,
रास्ता भी अब बस एक गुमाँ बनकर रह गया।
मंज़िल का क्या गिला हो, जब दिल ही न रहा साथ,
हर इक सफ़र भी दरमियाँ बनकर रह गया।
मनाली, तेरा दर्द भी अब सादा-सा हो चला,
घर बनते-बनते बस एक मकाँ बनकर रह गया।.....

Hindi Poem by Manali : 112020357
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