Hindi Quote in Story by Rahul Agarwal

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जादुई माला एक गरीब लड़की थी रतना जंगल में उगने वाले फूलों के पौधों से फूल चुनकर उनकी माला ब्लॉक बनाकर बेचा करती थी इसी से रत्न और उसकी गरीब मां का गुजारा चलता था जब रतना चार साल की थी तभी उसके पिताजी एक बीमारी में चल बसे और गरीब रत्न अपनी मां के आंचल की छांव में पली बड़ी रतना की यह खूबी थी कि वह जंगल में नीचे गिरे हुए फूलों को ही चुनती थी कभी भी किसी भी पौधे से फूल नहीं तोड़ती जमीन पर पड़े हुए फूलों को चुनकर लाती और उनकी माला बनाती जंगल में पाए जाने के कारण वह फूल बहुत ही ज्यादा ताजा और खुशबूदार होते थे रतना की माला दिनों दिनबिक जाती एक दिन रतना की टोकरी में पता नहीं क्या कारण था कि कोई भी माल नहीं बिक पाई उसे दिन वहां के मंदिर में भी भीड़ बहुत कम थी जहां पर रतन का गांव था और रतना उसका तो रोज का काम था माला बनाकर शाम को मंदिर के बाहर ले जाकर बेचना उसी से उन बेचारी मां बेटी का घर चला था उसकी मां लोगों के घरों में छोटे-मोटे कम कर दिया करती थी जैसे झाड़ू काटा बर्तन भांडा रतना अपनी बनाई हुई मालाओं म से एक माला अपनी मां और अपनी तरफ से अपने पिताजी की याद में भगवान को जरूर अर्पण करती और तभी अपनी छोटी सी दुकान लगती मंदिर के किनारे पर बैठकर जहां और भी दूसरे दुकान वाले अपनी दुकान लगाते थे जैसे अगरबत्ती प्रसाद फूलों की तो और भी दूसरी कहानी दुकान थी पर रतना के फूलों की माला की तो बात हीअलग थी जंगल के सबसे गहरी हिस्सों में जाती थी वह अपनी माल के लिए फूल चुने तभी तो रोज इतने ग्राहक आते थे पर वक्त रहते हैं ना कभी एक जैसा नहीं रहता जहां रोज ग्राहक आते थे वहां पर आज पता नहीं कोई भी ग्राहक क्यों नहीं आ रहा था सूर्यास्त होने लगा था दिन ढलने लगा था रात होने को आई और माला वह तो एक भी नहीं दिख पाई बेचारी रतना की इतने में पुजारी जी पास आए पर बोले बेटी आज क्या यहीं पर रहने का इरादा है तुम्हारी मां घर पर तुम्हारे लिए चिंता कर रही होगी तुम घर क्यों नहीं चली जाती रतना हर रोज भगवान के दर्शन करने के बाद उनका प्रसाद भी लेती थी और वह भी मां बेटी के पेट भरने में काफी हद तक काम आ जाया करता था और आज उसने प्रसाद लिया और भगवान के पास जाकर आंखों में आंसू भरकर बोली भगवान आज क्या एक भी ग्राहक नहीं आएगा अंधेरा होने आया है पर आज तो बोनी भी नहीं हुई मेरी रोज कुछ कमाई हो जाती थी जिस घर के लिए थोड़ा बहुत राशन लेकर चली जाती थी पर लगता है आज तुम फिर से मेरी परीक्षा लेने की तैयारी कर रहे हो अगर तुम्हारी इच्छा है कि आज हम मां बेटी भूखे रहे तो ऐसा ही सही इतना बोलकर रतना जाने ही लगी थी मंदिर लगभग सुनसान हो गया थ

Hindi Story by Rahul Agarwal : 112020257
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