थोड़ी हया तो होनी चाहिए इन आँखो में ,
थोड़ी तमीज़ तो होनी चाहिए बातो में,
रुतबा किसका कितना है क्या करना
रास्ते तो गिले हो ही जाते है बरसात में,
थोड़ा लहझा संभाला करे तो अच्छा है
नफ़रत में घर तक जल जाते है बातो में,
फुर्सत किसको है किसी की मुलाक़ात की
यहाँ चेहरे तक पहचाने जाते है हालातों में ,
थोड़ा नरमी रखा करिए ‘बिना रंग बदले
फिर देखिए लोग भीग जाते है जज्बातों में .❤️