“बदलाव का नारा” 🔥
जुल्मों का काला चेहरा अब सबके सामने होगा,
मेहनत का सच्चा हक़ भी जनता को मिलना होगा।
महलों की ऊँची दीवारें कब तक बच पाएँगी,
उठती जनलहर आगे सब कुछ बह जाना होगा।
भूखे नयन जलते हैं अंगारों जैसी ज्वाला,
सड़कों का उठता शोला बदलाव का नारा होगा।
मेहनत की कमाई जो छीनी गई हम सबसे,
अन्याय का हर क़िला अब टूट बिखर जाना होगा।
सदियों से दबा आक्रोश लावा बनकर फूटेगा,
धरती का कण-कण फिर रणघोष सुनाना होगा।
मेहनत का पसीना अब चुपचाप नहीं बहेगा,
कहता “प्रसंग” अत्याचारी अंततः हारा होगा।
-प्रसंग
प्रणयराज रणवीर