तेरी यादों का बोझ लिए,
मैं खामोशी में जीती हूँ।
हँसने की कोशिश करती हूँ,
पर अंदर ही अंदर रोती हूँ।
बरसती बूंदों में ढूँढती हूँ तुझको,
पर तेरा कोई निशान नहीं मिलता।
दिल पुकारे हर पल तेरा नाम,
पर तू कहीं भी पास नहीं मिलता।
वो कसमे, वो वादे तेरे,
सब धुएँ बनकर उड़ गए।
जिस दिल को तूने अपना कहा,
आज उसी दिल के टुकड़े हो गए।
कभी तो लौटकर देखेगा तू,
इन भीगी आँखों की कहानी।
तेरे बिना जो टूट गया,
वो मेरा दिल था… मेरी ज़िंदगी नहीं।
बरसती बूंदों में ढूँढती हूँ तुझको,
पर तन्हाई ही अब साथी है।
जिसे चाहा था दिल से मैंने,
वो अब सिर्फ एक याद बाकी है…