**** होली ****
जब से कर ली तूने मेरे दिल की चोरी, कन्हैया, चूनर- चोली मोरी रहती है कोरी
बरसे रंग नीले पीले, लाल, गुलाल; पर काया मोरी, रह गई कोरी कि कोरी
तुझ बिन होली नहीं भाये, कौन करे ठिठोली , न कोई करे मुझसे बरजोरी
मोहन, तरस गई है अखियान मोरी, और रातो की नींदे भी तूने कर ली चोरी
अब रंग न भाये मोहे, न भावे साज- श्रंगार , मांग मोरी सुनी है, और कलाई कोरी
खेलना तू मस्ती में आज, तेरे मथुरा में होली, क्युकी आयेगी न वहां अब ब्रिजवासीयो की टोली !
"फिर भी मोરે कान्हाइ, तुझे देती हूं मैं होली की हार्दिक बधाई", रोती हुई राधिका बोली।
"अनार "