“पत्नी मजबूत दिखती है…
क्योंकि उसे टूटने की इजाज़त नहीं।”
“मैं सब संभाल लेती हूँ,
क्योंकि मेरे लिए कोई नहीं संभालता।”
“मैं रोती नहीं सामने,
क्योंकि मुझे ही सहारा बनना है।”
“पत्नी की थकान,
कभी दिखाई नहीं देती।”
“मैं ठीक हूँ कहती हूँ,
क्योंकि मुझे ही ठीक रहना है।”
“मैं कमजोर नहीं,
बस अकेली मजबूत हूँ।”
“मेरे दर्द का समय नहीं,
क्योंकि घर का समय पहले है।”
“मैं खुद को बाद में रखती हूँ,
क्योंकि सब पहले हैं।”
“पत्नी की चुप्पी में,
पूरा घर छुपा होता है।”
“मैं गिर भी जाऊँ,
तो उठना खुद ही पड़ता है।”
“मुझे सहारा नहीं,
जिम्मेदारियाँ मिली हैं।”
“मैं टूटती भी हूँ,
पर दिखती नहीं।”
“मेरी जरूरत सबको है,
पर मेरी जरूरत कोई नहीं।”
“मैं थकती हूँ,
पर रुक नहीं सकती।”
“पत्नी होना,
खुद को पीछे रखना है।”