अधूरा रह गया।
तू साथ छूटी तो हर एक ख़्वाब अधूरा रह गया,
हँसते लम्हों के बीच इक दर्द ठहरा रह गया।
तेरी आंखों में जो देखा, कह न पाया उम्र भर,
लब पे आकर भी वो एहसास दबा-सा रह गया।
घर में रौशन थे दिए, फिर भी अँधेरा छा गया,
तेरे बिना हर कोना सूना-सूना रह गया।
तूने छोड़ा हाथ तो हिम्मत भी साथ छोड़ गई,
चल तो पाया मैं मगर मन कहीं अटका रह गया।
तेरी आहट के सहारे कट गई थीं रातें सब,
अब तो हर सन्नाटे में तेरा साया रह गया।
सब कुछ कह के भी प्रसंग ख़ामोश रह गया,
तेरी मौजूदगी में भी दिल अधूरा रह गया।
प्रसंग
प्रणयराज रणवीर