बन्द करो ये चलना-फिरना
बन्द करो ये जय-जयकार,
दीर्घ शान्ति को आ जाने दो
बन्द करो ये भाषणवाद।
आ जाने दो हवा शान्ति की
रह जाने दो अरण्य देवतुल्य,
बन्द करो ये ठगना-ठगाना
बन्द करो ये शैक्षिक व्यापार।
पूर्ण करो पूजा मन की
बन्द करो लय के व्यवधान,
आ जाने दो स्नेह की धारा
बन्द करो झूठे वादे सादे।
रोको सारे रण के रथ
बन्द करो ये जय-जयकार,
सुख-दुख रख प्राणों के अन्दर
ले आओ सब फूल भरे रथ।
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महेश रौतेला