ऐसे तो हालात नहीं हैं मेरे
कि तेरे लिए ख़ुद को बर्बाद कर लें
इश्क़ को हमने तहज़ीब दी है
हर एक जज़्बे को आबाद कर लें
तेरी निगाहों का एक इशारा
काफ़ी है, सदियों को याद कर लें
हमने सिखाया है दिल को अक्सर
ज़ख़्मों को चुपचाप आज़ाद कर लें
तू सामने हो तो रुक जाती है साँस
दूर हो तो तुझसे फ़रियाद कर लें
हम फ़क़ीर-ए-इश्क़ ठहरे हैं
जो मिल जाए, उसी में इजाद कर लें