मैं हूँ गुलाब
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अनेकों पंखुरियों को खुद में समेटे,
सबको साथ लेकर चलने की प्रेरणा देता हूँ मैं।
काँटों के बीच में खिलखिलाकर हँसता हुआ मैं,
सीखो मुझसे परेशानियों में भी मुस्काना।
अनेकों रूपों में खुद को ढालकर सिखाता हूं मैं।
जो खुद को परिस्थितियों और जरूरत के हिसाब से,
खुद को ढाल लेते है वो हर दिल पर राज करते है।
अनेकों रंगो को खुद में संजोये हुए मैं,
सारी भावनाओं का प्रतीक हूँ ,
चाहे वो प्रेम हो, दोस्ती हो, प्रशंसा हो
या फिर सादगी।