दुख अपना...खुद ही सहना
फिर क्यों किसी से कहना !
रोकर सुनेंगे, हंसकर उड़ाएंगे
दुख का तेरे तमाशा बनाएंगे।
दुख भी एक मियाद लेकर आता है
एक सीमा के बाद खुद ही कम हो जाता है।
तूफान के बाद हो जाता है सब शांत
दुख लोगों की करा जाता है पहचान।
सरोज प्रजापति ✍️
- Saroj Prajapati