*शब्द चोर*
चोरों की महफ़िल सजी, लूटें शब्द अपार, मजदूर खटे स्याही से, मालिक करें प्रचार। हृदय से निकली जो कथा, वो जग में हुई महान, पर असली शिल्पी रह गया, जग में अब अनजान।
कहे 'आशीष' सुन लेखका, मत हो तू निराश, तेरी कलम की गूँज ही, है तेरी असली साख। शब्द चुरा लें भले कोई, पर भाव कहाँ से लाएंगे? ये 'रथ' की भारी बात अब, बस तेरे नाम से जानेंगे।
Adv. आशीष जैन
7055301422