।। मन का मिलन ।।
जब राहें ही न जुड़ पाएँ, तो साथ चलना कैसा है?
बिना मिले दो दीपों का, एक साथ जलना कैसा है?
पर प्रेम तो वह अदृश्य डोर है, जो खिंचती चली जाती है,
बिना बात के भी यह रूह, एक-दूसरे को पाती है।
मुलाकात तो बस शरीर की है, असली मिलन तो मन का सावन है,
जहाँ यादों की बूँदें गिरें, वहीं प्रेम का पावन आँगन है।
बिना बोले जो सुनाई दे, वह धड़कन का गीत निराला है,
बिना छुए जो तन को भिगो दे, वह नेह का प्याला है।
यदि जज़्बात के बीज न हों, तो रिश्ता रेत का महल है,
और अगर अहसास जिंदा हैं, तो हर मुश्किल का हल है।
जैसे चकोर और चाँद का मिलना, बस आँखों का एक सपना है,
वैसे ही दूर रहकर भी, मेरा हर हिस्सा तेरा अपना है।
वजह न पूछो मिलने की, यह तो साँसों का बंधन है,
बिना मिले जो महकता रहे, यह वही यादों का चंदन है।
जहाँ दो दिल एक हो जाएँ, वहाँ दूरी का क्या काम?
बिना बात और बिना मुलाकात, पूरा होता है प्रेम का नाम।
adv. आशीष जैन
7055301422