🦋...𝕊𝕦ℕ𝕠 ┤_★__
{{वजूद का पिघलना}}
मैंने अक्सर बादलों को देखा है
वो हारते नहीं हैं,
बस हार मान लेते हैं मिट जाने
के लिए,
इंसान भी तो ऐसा ही है, किसी
को धूप से बचाने के लिए,
अक्सर खुद को धूप में खड़ा
कर देता है,
हम हमेशा बड़ी क्रांतियों की
उम्मीद करते हैं,
मगर कभी-कभी एक इंसान
को बस एक तसल्ली की छत
चाहिए होती है,
ज़रूरी नहीं, कि तुम हर बार
समंदर बनकर किसी की प्यास
बुझाओ,
कभी-कभी बस छाँव बन जाना
भी एक मुकम्मल इबादत है,
मगर छाँव बनना भी इतना
आसान कहाँ है,
छाँव बनने के लिए सूरज से
लड़ना पड़ता है,
खुद को तपाना पड़ता है ताकि
नीचे खड़ा शख्स सुकून से
सांस ले सके,
देने की सामर्थ्य हाथों में नहीं
उदारता के उस पल में होती है,
जहाँ हम खुद को, मैं' से, हम'
बना लेते हैं,
ठीक वैसे ही जैसे मेघ जब तक
वे अहं' बनकर आसमान में तने
रहे, सिर्फ गरजते रहे,
मगर जिस पल वे पिघले उनका
नाम मिट गया, उनकी पहचान
खो गई पर धरती की कोख हरी
हो गई,
शायद, किसी के काम आने की
पहली शर्त यही है,
कि हम इतने लचीले हो जाएँ
कि ज़रूरत पड़ने पर, अपने
पुराने वजूद का कफ़न ओढ़ सकें,
ताकि एक नया स्वभाव जन्म
ले सके, जो बरस सके, जो छा
सके, जो बचा सके…🥀🖤
#𝐉𝐀𝐈_𝐒𝐇𝐑𝐄𝐄_𝐑𝐀𝐌 ..🚩
#𝗴𝕠𝕠𝗱_𝕄𝗼𝗥𝗻𝕚𝗡𝕘_ ..🌸
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☞#motivatforself 😊°
⎪⎨➛•ज़ख़्मी-ऐ-ज़ुबानी°☜⎬⎪
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