एक बार की बात है—
अपने ही उकसावे में आकर
मैंने अकेले तीखी मिर्च खा ली।
जलन ऐसी थी
कि शब्द भी जलने लगे,
मुँह में छाले पड़े
और आँखों ने बिना पूछे
दर्द लिख दिया।
उसी पल मेरे पिता ने
मेरा हाथ थामकर कहा—
“ज़िंदगी में खुद को साबित करने की ज़िद
अगर हर मोड़ पर रख ली,
तो आदमी खुद से ही हार जाता है।
बेटी, खुद को वही चुनना
जहाँ तुम्हारी हिम्मत
तुम्हारा साथ दे,
और दिल कह सके—
हाँ, यह मैं कर लूँगी।
हर चुनौती ज़रूरी नहीं,
और हर ज़िद बहादुरी नहीं होती।”
~ priti