की जमानेका दर्द हमे मत बताओ हमने जरूरत से ज्यादा आंसू बहाएं है
कमबख्त जिंदगी से पीछा छुड़ाते छुड़ाते जिन्दगीसेही मोहब्बत कर बैठे हे
वो तो अपने जमानेमे महफूज हैं हम खामखां उनकेलिए रोए हे
सजाई चिंतापर उनको लिटाकर हम खुदही जमानेकेलिए रोए हैं
- Kartik Kule