ये ख्याल बस इतना सा है। एक लड़का,, लड़की से उसके शादी के आखरी दिन भी पूछता है।
कि अगर मुझ से इतना प्यार करती हो तो भाग चलो।
लेकिन लड़की मना कर देती है। कि में यह गलत कदम नहीं उठाऊंगी।
ओर प्रॉब्लम ये है कि परिवार और समाज दोनों ही उनके प्यार के दुश्मन हैं ओर दोनों ही उनके रिश्ते के खिलाफ हैं।
उनकी कुछ बातें ओर आखरी समय की यादें इस ख्याल में हैं।
लड़की:
मुझे यहां से लेजाकर तुम कबतक खुशी मनाओगे।
रिश्ते अगर निभाने हैं तो यहीं पर वापस लाओगे।
रोज मिलेंगे ताने मुझको,,,रोने किसके पास में जाऊंगी।
यहां सिर्फ तुम ही मेरे हो,,वर्ना खुद को अकेला ही पाऊंगी।
लड़का:
ये लोक लाज से डरने वाले,,
धर्म की चिंता करते हैं।
समाज में रत्ती भर नाम न इनका,,
फिर भी इज्जत के लिए मरते हैं
लड़की:
घर वाले चाहे लाख गलत हों।
मेरा,,,बुरा कभी ना चाहेंगे
कोशिश तो करो,, बात करो घर मेरे
दोनों ही परिवार वालों को मनाएंगे
लड़का:
तू खुश है न इस शादी से,,
क्या याद मेरी तुझको आएगी।
जब भी करेगी याद तू मुझको,,
सामने खड़ा ही पाएगी।
बहुत मनाया तुझको मैने,,
तो अब तेरी झूठी कसम न खाऊंगा।
चाहे चली जाए जान मेरी,,
तेरी जिंदगी में नजर न तुझको आऊंगा।
लड़का पीता नहीं था। फिर भी पहाड़ की चोटी पर बैठा शराब की बोतल होठों से लगा कर बैठा है।
क्योंकि रोकने वाला तो उसकी जिंदगी से जाने वाला है।
तो फिर जिए भी किसके लिए।
तभी उसका दोस्त भागा भागा उसके पास आया। जो लड़की की शादी में गया हुआ था।
लड़के ने लास्ट टाइम भी लड़की का फोन नहीं उठाया।
इसलिए लड़की ने एक चिट्ठी लिख कर दोस्त को दे दी।
दोस्त ने आकर वो चिट्ठी लड़के को थमा दी।
तभी लड़का सोच कर कहता है।
लड़का:
हाथों में मेंहदी पैरों में बंधन
ओर गालों पर उसके लाली है
अब कैसे कह दूं मेरी जान सिर्फ मेरी है।
वो तो किसी ओर की होने वाली है।
वो लड़की की चिट्ठी को नजरअंदाज करके फेकना चाह रहा था। लेकिन मन बदल कर पढ़ लेता है।
""लड़की:
पापा की इज्जत का सवाल है
में मंडप छोड़ कर नहीं आऊंगी
तेरी हूं सिर्फ तेरी ही रहूंगी
तेरी न हुई तो सच में मर जाऊंगी।""
दोनों ही लड़की के घर के लिए भागते हैं। लेकिन अब शायद देर हो चुकी थी।
लोग:
आंखों में थे आसूं उसके,,
ओर मासूम से चेहरे पर मुस्कान थी।
दम तोड़ते वक्त भी शब्द यही थे उसके।
ना किया कोई धोखा मैंने,,में सिर्फ तुम्हारी ही जान थीं।
दिल टूटा आशिक उसका,,
कुछ इस तरह हद से गुजर गया।
उठा कर उसको फेरे लिए सारे,,
रोते रोते सिंदूर मांग में भर गया।
कसकर सीने से लगाया उसने
ओर कुछ इस तरह उसने अपने प्यार को पा लिया।
जितना जहर बचा था उसकी मुट्ठी में।
सारा उसके हाथों से खा लिया।
जीते जी तो मिल न पाए,,
बातें भी उनकी अधूरी ही रहीं।
दम तोड़ा उसने लड़की की बाहों में,,
शायद मरने के बाद उनकी कहानी पूरी हुई।