तेरा नाम लिया जब भी, दिल ने सुकून पाया,
वरना तो हर धड़कन ने बस दर्द ही गाया।
चुपचाप रहा मैं भी, तू भी ख़ामोश थी,
फिर भी तुझे हर लफ़्ज़ में मैंने ही पाया।
वक़्त की चालों में हम कुछ यूँ उलझे,
कि खुद को भी हमने कई बार गंवाया।
जिस शहर में तेरा ज़िक्र हुआ करता था,
अब उस शहर ने ही हमें भूलाया।
तू पास नहीं फिर भी एहसास है गहरा,
तेरी ही यादों ने हर ज़ख़्म को सहलाया।
_🖤Ks