Hindi Quote in Poem by Sudhir Srivastava

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नववर्ष और यमराज की पीड़ा
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आप सभी को मेरे मित्र यमराज की ओर से
नववर्ष की अनंत बधाइयाँ शुभकामनाएँ,
आप स्वस्थ मस्त व्यस्त जबर्दस्त रहें
या नये वर्ष में चूल्हे भाड़ में जाएँ।
आप शराफत से स्वीकार कर लें, तो अच्छा है,
नहीं स्वीकार करें, तो ये सबसे अच्छा है
पर आप सब मेरे अपने हैं, इसलिए बता रहा हूँ
कि आप सब बड़ी भूल कर रहे हैं,
यह मैं अपनी ओर से बिल्कुल नहीं कह रहा हूँ
ब्लिक ऐसा हमारे मित्र यमराज जी कह रहे हैं,
लगता है कि आप सबसे नाराज चल रहे हैं
पर मुझे नहीं लगता, वे सचमुच नाराज हैं।
फिर क्यों आप सब इतना उतावले हो रहे हैं?
जो थोड़ा भी सब्र नहीं कर पा रहे हैं,
या खुद को सबसे बड़ा बुद्धिमान समझ रहे हैं।
चलिए! मैं मान लेता हूँ कि आप बड़े बुद्धिमान हैं
यदि ऐसा है तो मित्र यमराज के सवालों का जवाब दीजिए,
मैं समझता हूँ कि वो ग़लत भी तो नहीं कह रहा है
फिर आपको इतनी मिर्ची क्यों लग रहा है?
आखिर आंग्ल नववर्ष को आप सब
इतना मान सम्मान क्यों दे रहे है?
अंग्रेजियत के लबादे में लिपटे
इस नामुराद के स्वागत में बिछे क्यों जा रहे हैं?
नाच, गाकर उत्सव मना रहे हैं
सड़कों पर जमकर हुड़दंग कर रहे हैं,
सभ्यता, संस्कार, मर्यादा को ताक पर रख रहे हैं,
आधी रात से आंग्ल नववर्ष की बधाइयाँ, शुभकामनाएं
औपचारिकतावश इनको, उनको देने में लग जा रहे हैं।
मगर हमारे मित्र यमराज को भी बताइए
आखिर इसमें कौन-सा तीर मार रहे हैं?
अपनी भारतीय संस्कृति, सभ्यता, संस्कार को
अंग्रेजियत का लबादा ओढ़ अपमानित कर रहे हैं।
क्या सनातनी नववर्ष को भी इतना ही मान-सम्मान देते हैं ?
उसके आगमन की खुशी में भी इसी तरह कसीदे पढ़ते हैं?
इसी उल्लास से, नाच गाकर स्वागत अभिनंदन करते हैं,
और तो और कितनों को सनातनी नववर्ष की
बाखुशी बधाइयाँ, शुभकामना देते हैं?
सच तो यह जनाब आप सब भ्रम में जी रहे हैं,
अपने हाथों अपने अपमान संग
खुद को ही गुमराह कर रहे हैं,
थोक में दोषारोपण औरों पर कर रहे हैं।
अब मैंने तो अभी तक कुछ कहा ही नहीं,
सिर्फ मित्रता का धर्म निभाया,
नववर्ष की शुभकामनाओं के साथ
मित्र यमराज की पीड़ा ही तो दोहराया,
अब यह आपकी समस्या है कि आपके भेजे में
मेरे मित्र की पीड़ा कितना गहरे तक उतर पाया,
या सिर्फ औपचारिकताओं की चाशनी में लिपट
सिर्फ नववर्ष की बधाइयाँ, शुभकामनाओं ने ही कब्जा जमाया,
और आपको मेरे मित्र यमराज की पीड़ा का
तनिक बोध तक नहीं हो पाया।
तब यमराज मित्र की बधाइयाँ, शुभकामनाओं का
सवाल ही भला कहाँ आया?
मतलब साफ़ है कि आप सबने
मेरे मित्र का सिर्फ दिल ही दुखाया,
उसकी आंग्ल नववर्ष की बधाइयाँ, शुभकामनाओं को
असंवेदनशील बन हवा में उड़ाया,
एक बार भी यमराज मित्र का ख्याल
आप शुभचिंतकों को नहीं आया,
तब यमराज मित्र के इतना कहने सुनने का
मतलब ही क्या रह गया भाया?
फिर भी मैंने नववर्ष के बेसुरे राग संग
बधाइयाँ, शुभकामनाओं और पीड़ा को
ससम्मान आप तक तो पहुँचाया।

सुधीर श्रीवास्तव

Hindi Poem by Sudhir Srivastava : 112011142
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