नववर्ष और यमराज की सीख
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अति उत्साह में दो दिन पूर्व ही
मैंने यमराज को फोन लगाया
और बड़े प्यार से नववर्ष की
अग्रिम बधाइयाँ शुभकामनाएं देकर दुलराया।
प्रत्युत्तर में उसने मौन साध लिया
मुझे लगा कि शायद नेटवर्क बाधा ने
मेरे संदेश को बीच में ही लपक लिया,
मैंने अपना संदेश दोहराया
सुनते ही बंदा हत्थे से उखड़ गया।
हमनें आपसे कब इस नामुराद नववर्ष की
बधाइयाँ शुभकामनाएं माँगी थी?
मैंने कहा - अरे यार!
बधाइयाँ शुभकामनाओं कोई माँगता है क्या?
यह तो महज एक औपचारिकता है,
जन्मदिन, वैवाहिक वर्षगाँठ, प्रमुख पर्व
तीज-त्योहार, विशेष अवसर या सफलता की तरह
एक अवसर हमें आंग्ल नववर्ष भी तो देता है
हर कोई अपने और अपनों को
बधाइयाँ शुभकामनाएं देता है,
उनके और उनके परिवार के
सुख, समृद्धि की कामना करता है,
भले ही औपचारिकताओं की परंपरा निभाता है
तब तू ही बता कि तुझे बधाइयाँ शुभकामनाएं देना
भला अपराध की किस श्रेणी में आता है?
बदले में यमराज ने मुझे आइना दिखाया-
क्या सनातनी हिंदू नववर्ष पर मुझे
बधाइयाँ शुभकामनाएं देने का ख्याल भी
इसके पहले कभी आपको आया?
बस! इसीलिए मुझे गुस्सा आया।
बड़ा अफसोस होता है आप सबकी सोच पर
जो अपना है, उसे भाव नहीं देते
अपनी सभ्यता, संस्कृति, संस्कार का सम्मान नहीं करते
जो सदियों से चला आ रहा है
जिसकी प्रमाणिकता मान सम्मान, महत्व,
पौराणिक ग्रंथों वेद, पुराण, उपनिषदों में
आज तक मिलता आ रहा है,
आधुनिक विज्ञान भी जिसके आगे सिर झुकाता है।
मगर आपको यह सब कहाँ समझ आता है?
सिर्फ बकवास ही तो सुहाता है,
क्योंकि आपको तो आधुनिकता का रंग ही भाता है।
मगर सच कहूँ तो आपका यह पुनीत व्यवहार
जाने क्यूँ मुझे अंदर तक घायल कर जाता है,
आप मेरे मित्र हो, इसलिए आप पर गुस्सा भी आता है।
आप अंग्रेजी नववर्ष का स्वागत अभिनंदन कीजिए
जी भरकर बधाइयाँ, शुभकामनाएं दीजिए,
दारु, रम, व्हिस्की पीकर हुड़दंग कीजिए
यार दोस्तों संग पार्टी कीजिए,
वैसे भी मेरी बात आपको समझ नहीं आयेगी।
इसलिए जो भी करना हो खुलकर करिए
मगर मुझे इन सब चोंचलों से मुझे दूर ही रखिए
बधाइयाँ, शुभकामनाएं देने की उत्सुकता को
सनातनी नववर्ष, नव संवत्सर तक सहेजकर रखिए
और अभी के अभी बिना किसी तर्क वितर्क के
फिलहाल फोन को विश्राम दीजिए,
नव संवत्सर के शुभ-दिन का इंतजार कीजिए,
तब तक के लिए इन बधाइयाँ शुभकामनाओं को
अपने पास बहुत सहेजकर रखिए,
आंग्ल नववर्ष के आगमन पर मेरी और से
औपचारिक बधाइयाँ शुभकामनाएं
सहर्ष स्वीकार कर तनिक तो मुस्कराइए।
सुधीर श्रीवास्तव