Hindi Quote in Poem by PAYAL PARDHI

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मैंने कहा—
“आगे बढ़ते हैं,”
पर उसने मुझे रोक लिया।
ज़िंदगी मेरी बीतती गई,
और वो चैन से सोता रहा।

मेहनती आगे बढ़ते रहे,
मैं बेचारा देखता रहा।
आसमान को छूते रहे वो,
मैं अपाहिज-सा बना रहा।
बोल उठा उनका इतिहास भी,
मैं गूँगा बना रहा।
ज़िंदगी मेरी गुजर गई,
पर वो चैन से सोता रहा।

थक कर पूछा मैंने उससे—
“तू है कौन जो फ़ैसले लेता गया?”
डाँट कर बोला उसने—
“हम दोनों तो एक ही हैं।
तू करता रहा,
जो मैं करवाता गया।
तेरा आलस हूँ मैं,
जो तेरे भीतर पलता गया।
तू सोचता रहा—
मैं कल पर टालता गया।
सब कामयाब होते गए,
तू देख-देख जलता गया।
ज़िंदगी तेरी बीत गई,
मैं चैन से सोता गया।”

तेरा दुश्मन तू खुद ही था,
दोष किस्मत को देता गया।
जवानी तेरी बीत गई,
बुढ़ापा तेरा आ गया।
पंख लगा सब उड़ गए,
तू खुद के पंख नोचता गया।
ज़िंदगी तेरी बीत गई,
चैन से क्यों तू सोता रहा?

मैंने कहा—
“अब क्या करूँ?
वक़्त हाथ से फिसल गया।”
उसने कहा—
“जो करना है अब कर ले,
तुझे रोकते-रोकते
अब मैं भी तो थक गया।”


-----PAYAL 💕PARDHI.

Hindi Poem by PAYAL PARDHI : 112010845
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