ग्रहों की महादशा तथा अन्तर दशा में प्रदान किए जाने वाले शुभ अथवा अशुभ प्रभाव के कारण __
सूर्य आत्मबल, अहं और सत्ता का ग्रह है। जो व्यक्ति सत्य, धर्म और उत्तरदायित्व से जुड़ा रहता है उसके लिए सूर्य सम्मान, प्रतिष्ठा और नेतृत्व देता है, किंतु अहंकारी, अत्याचारी या कर्तव्यच्युत व्यक्ति के लिए वही सूर्य अपमान, पदहानी और अधिकार से पतन का कारण बनता है।
चंद्र मन, भावना और संवेदना का ग्रह है। संतुलित मन, शुद्ध भाव और करुणा रखने वाले के लिए चंद्र मानसिक शांति, लोकप्रियता और भावनात्मक सुरक्षा देता है, परंतु अस्थिर, भयग्रस्त या छलपूर्ण मन वाले व्यक्ति के लिए चंद्र भ्रम, अवसाद और मानसिक अशांति देता है।
मंगल साहस, ऊर्जा और कर्म का ग्रह है। अनुशासित, परिश्रमी और संयमित जीवन वाले व्यक्ति को मंगल शक्ति, रक्षा और विजय देता है, जबकि क्रोधी, हिंसक या अव्यवस्थित जीवन शैली वाले व्यक्ति को दुर्घटना, विवाद और शारीरिक कष्ट देता है।
बुध बुद्धि, वाणी और विवेक का ग्रह है। सत्यनिष्ठ, अध्ययनशील और स्पष्ट सोच वाले व्यक्ति के लिए बुध सफलता, संवाद-कौशल और व्यावहारिक बुद्धि देता है, किंतु छल, झूठ, चालाकी और गलत तर्क का प्रयोग करने वालों के लिए वही बुध भ्रम, वाणी दोष और निर्णयों में हानि देता है।
गुरु ज्ञान, धर्म और मार्गदर्शन का ग्रह है। श्रद्धा, नैतिकता और गुरु-भाव रखने वालों को गुरु उन्नति, संरक्षण और सद्बुद्धि देता है, परंतु अहंकारी, अधार्मिक या ज्ञान का दुरुपयोग करने वालों के लिए गुरु पतन, अवसरों की हानि और मार्गभ्रष्टता का कारण बनता है।
शुक्र सुख, भोग और संबंधों का ग्रह है। संयम, प्रेम और सौंदर्य-बोध रखने वालों को शुक्र वैभव, प्रेम और कला-सुख देता है, लेकिन भोग-विलास, वासना और अनैतिक संबंधों में लिप्त व्यक्ति के लिए शुक्र रोग, संबंध-विच्छेद और अपयश देता है।
शनि कर्म, अनुशासन और न्याय का ग्रह है। परिश्रम, धैर्य और कर्तव्यनिष्ठा रखने वालों के लिए शनि स्थायित्व, सम्मान और दीर्घकालीन सफलता देता है, जबकि आलसी, छलपूर्ण और जिम्मेदारियों से भागने वालों के लिए वही शनि विलंब, दंड और कठोर अनुभव देता है।
राहु इच्छाओं, भ्रम और असामान्यता का ग्रह है। शोध, साधना और नवीन सोच वाले व्यक्ति के लिए राहु अचानक उन्नति और विशिष्ट पहचान देता है, परंतु नशा, जुआ, लालच और छल में लिप्त व्यक्ति के लिए राहु पतन, बदनामी और आत्मविनाश की ओर ले जाता है।
केतु वैराग्य, मोक्ष और अंतर्मुखता का ग्रह है। आत्मचिंतन, साधना और सत्य की खोज करने वालों को केतु गहन ज्ञान और आध्यात्मिक स्पष्टता देता है, किंतु कर्तव्य से पलायन और भ्रम में रहने वालों के लिए केतु अलगाव, दिशाहीनता और जीवन में शून्यता का अनुभव कराता है।