अपना अनमोल दिल
जब हमारे पास कुछ अनमोल होता है,
तो हम उसे हथेलियों में छुपा कर रखते हैं,
हवा से भी बचाते हैं,
कि कहीं ज़रा-सी ठोकर में टूट न जाए।
पर ये दिल भी तो अनमोल है,
जिसमें खुद रब ने अपना घर बनाया है,
फिर भी इसे हम सबसे ज़्यादा
लापरवाही से दूसरों के हाथों में दे देते हैं।
कभी शब्दों से,
कभी उम्मीदों से,
कभी बेपरवाह रिश्तों से
इसे रोज़ थोड़ा-थोड़ा तोड़ते रहते हैं।
अपना अनमोल दिल संभाल कर रखना,
क्योंकि ये काँच से भी नाज़ुक होता है,
एक बार चटक गया ना…
तो आवाज़ नहीं करता,
पर इंसान को अंदर से बिखेर देता है।
और याद रखना,
जब दिल पूरी तरह टूट जाता है,
तो मुस्कुराता हुआ चेहरा भी
कहीं न कहीं खो जाता है…