✧ अज्ञात अज्ञानी की आत्मा कथा
✧ साधारण से शून्य तक — एक ही सांस में ✧
✍🏻 — 𝓐𝓰𝓨𝓐𝓣 𝓐𝓰𝓨𝓐𝓷𝓲
मैंने जीवन को जीतने नहीं,
समझने निकला हूँ।
असाधारण बनने का खेल छोड़
मैं साधारण रहने की हिम्मत कर रहा हूँ।
अनिश्चितता मेरा मार्ग है —
जहाँ हर कदम नया जन्म है।
पागलपन मेरा मित्र है —
जो दीवारें नहीं, दरवाज़े दिखाता है।
स्वतंत्रता का अर्थ —
न मंज़िल, न उम्मीद।
सत्य जब भी पकड़ने जाऊँ
हाथ से फिसल जाता है
और मौन में लौट आता है।
शून्य में उतरने पर ही जाना —
मैं कभी था ही नहीं।
बुद्धि की चमक धोखा थी
प्यार ने अहंकार की चिता जलाई
मृत्यु ने जीना सिखाया
आत्मा ने बताया —
मैं शरीर नहीं हूँ।
ध्यान घर ले जाता है
ऊर्जा उड़ना सिखाती है
समर्पण dissolve कर देता है
कीर्तिहीनता अमर बना देती है।
श्वास — दरवाज़ा है
कर्म — यात्रा है
विश्वास — कदम है।
और अंत में —
कुछ भी करने को नहीं बचता।
सिर्फ यही बचता है:
मैं नहीं — बस यह है।