मेरे जैसे पर मरती हो
तुम भी यार हद करती हो
मैंने बस तुम्हें ही पाना है
तुम कितनी जिद्द करती हो
मैं भी दीवाना हो जाता हूं
तुम जब जब आहें भरती हो
तिरछी नज़रों से देख रही हो
क्यों मुझको पागल करती हो
कल मेरे यार मुझसे पूछ रहे थे
किसके लिए इतना संवरती हो
_बेख़बर