किसी की ताकत बनो मजबूरी नहीं
( पार्ट - 2)
ताकत बनो,
क्योंकि जब तुम ताकत बनते हो,
तो किसी की आत्मा को उठाते हो,
किसी की उम्मीद को जिलाते हो।
और जब कोई इंसान
फिर से उम्मीद करना सीखता है,
तो दुनिया थोड़ी बेहतर हो जाती है।
याद रखो —
कभी किसी की जिंदगी में
ऐसा किरदार मत बनो
जो उसके लिए
खुद को खो देने की मजबूरी बन जाए।
बल्कि ऐसा बनो
जो उसे खुद को पहचानने की ताकत दे जाए।
कभी किसी के रास्ते में
दीवार मत बनो,
पुल बनो।
कभी किसी के आंसूओं में
कारण मत बनो,
रूमाल बनो।
कभी किसी की कमजोरी मत खोजो,
उसकी छिपी हुई हिम्मत खोजो।
अगर दुनिया में हर कोई
किसी की मजबूरी नहीं,
बल्कि ताकत बन जाए,
तो ना कोई टूटेगा,
ना कोई अकेला रहेगा।
हर दर्द का मरहम मिलेगा,
हर आंसू की जगह मुस्कान खिलेगी।
तो आज से —
कभी किसी की मजबूरी नहीं,
बल्कि उसकी ताकत बनो।
क्योंकि जब तुम किसी की ताकत बनते हो,
तो ईश्वर तुम्हारी ढाल बन जाता है।
और यही जीवन का सबसे बड़ा आशीर्वाद है।
"ताकत बनो – क्योंकि मजबूरियाँ वक़्त तोड़ देती हैं,
पर ताकतें, वक़्त को झुकाना जानती हैं..."