मेरे देश की जन्नत को देखने आया था मै
उन हसीन वादियों में खो जाने, आया था मैं
अपनों के साथ सुकून पाने आया था मैं, खुबसूरती को आँखों में केद करने आया था मैं
मेरे देश की जन्नत को देखने आया था मैं।
वो आके बोला, हिंदू हो या मुसलमान तुम बताओ,
मुसलमान हो तो कलमा सुनाओ,
"मैं बोला' में हिंदू हू
बस इतने में ही उसकी बंदूक की गोली का निशान बन चुका था मैं।
मेरे देश की जन्नत को देखने आया शा में।
जन्नत ना रही अब वह नकॅ बन चूकी थी,
बीवी,बच्चो के रोने की आवाज,
उन वादियों में गूॅज रही थी,
मेरे साथ मेरे हिंदू भाई भी आ गए धे उनकी चपेट मेॅ,
गुनाह क्या था हमारा, यही समझ नहीं पा रहा था मैं,
मेरे देश की जन्नत को देखने आया था मैं।