Hindi Quote in Poem by Sudhir Srivastava

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भैया दूज पर विशेष
यमराज का दर्द
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भैया दूज पर मैंने यमराज को
बधाइयां शुभकामनाएं देने के लिए फोन लगाया,
और बड़े प्यार से फ़रमाया
कि आज तो तेरे जलवे हैं प्यारे
क्योंकि आज तो तेरे पूजन अर्चन का विशेष दिन है।
आज तो तुझसे कोई भी नहीं डरेगा,
तुझे पूजेगा और अपने स्वार्थवश
तुझसे दीर्घायु जीवन की फरियाद करेगा,
धूप-दीप, आरती संग मेवा मिष्ठान अर्पित करेगा।
बहनें भाईयों की लंबी उम्र के साथ
धन-धान्य की तुझसे गुहार करेंगी,
पर सचेत रहना मित्र, तुझे पकवान तो
निश्चित है, बिल्कुल नहीं खिलायेंगी?
मगर कोई बात नहीं, तू चिंता मत कर
आज के दिन मुझे भी अपने साथ लेकर विचरण कर
कम से कम मैं ही कुछ लाभ उठा लूँगा
तेरे लिए सिफारिश कर माँग लूँगा।
यमराज ने धन्यवाद के साथ कहा
यार! क्या अब तू भी मेरा मजाक उड़ायेगा?
और मुझे तू ही क्या नमक का घोल पिलायेगा।
यह कलयुग है मित्र - स्वार्थ के बिना कुछ भी नहीं होता,
बिना स्वार्थ जले पर कोई नमक भी नहीं छिड़कता।
यमुना को वर देकर अब पछता रहा हूँ,
बहन का मामला है, वापस भी नहीं ले पा रहा हूँ।
लेकिन यह भी सच है कि अब मैं बहुत थक गया हूँ,
भाई-भाई न रहा, तो बहनों के भी भाव भी निराले हैं,
ऊपर से जितने उजले, भीतर से उतने ही काले हैं
अब तू कहेगा, ऐसा तो कुछ भी नहीं है
मैं भी कल तक ऐसा ही सोचता था,
पर अब समझ आया कि अपवादों का
इस कलयुग में कोई मतलब ही नहीं होता।
हर रिश्ते की तरह, इस रिश्ते में भी अब वो भाव नहीं रहा,
भाई हो या बहन, एक का घाव भी
दूजे को बिल्कुल नहीं दिख रहा।
वो खुश रहे, नाखुश रहे! उनकी बला से
भाई दूज पर भी हँसी-खुशी मिलने के ललक की
कोई झलक या तनिक उत्साह भी नहीं।
अब तो सिर्फ औपचारिकताएं निभाई जा रही हैं,
अपने-अपने स्वार्थ की आड़ में
भैया दूज की पैबंद लगाई जा रही है।
वैसे भी मेरा मुँह तू न ही खुलवा, तो ही अच्छा है
क्योकि सच सुन पाने में तू बिल्कुल कच्चा है,
मैं सच बोलूँगा, तो तुझे चुभ जायेगा
और कल से मेरे तिरस्कार का अभियान भी
मेरे यार, सबसे पहले तू ही चलाएगा।
वैसे भी मैं तो पहले से ही बदनाम हूँ,
पर क्या तू सच का सामना कर हौसले से कर पाएगा?
यमुना की तरह अपनी बहन का मान रख पाएगा?
मुझे पता है, तू निश्चित ही पीछे हट जाएगा ।
यमराज की जगह खुद को तू कभी रख ही नहीं चाहेगा।
ऐसे में क्या तू मुझे इतना बता पाएगा?
कि आज की यमुना के भीतर छिपे डर को
मिटाने का बीड़ा भला कौन उठायेगा?
कलयुग का यमराज बनने क्या तू आएगा?
ऐसा कुछ भी नहीं होगा मित्र
हम-तुम लाख कोशिश कर लें, अपना सिर फोड़ लें,
पर कुछ भी नहीं हो पाएगा।
क्योंकि कलयुग तो अपना ही रंग दिखाएगा
यमराज सदा से बदनाम था, आगे भी रहेगा
जिसका हकदार है, वो कभी नहीं पायेगा।
यमुना को दिए वचन से बँधा आज यमराज भी
सिर्फ अपने कर्तव्य की औपचारिकता ही निभाएगा
बदले में रोटी तो नहीं, किंतु गालियाँ जरुर खाएगा,
विवशताओं की आड़ में जबरन मुस्कराएगा
भाई दूज के पावन पर्व पर
किसी तरह औपचारिकतावश ही सही
अपना कर्तव्य तो पूरी जिम्मेदारी से निभाएगा।

सुधीर श्रीवास्तव

Hindi Poem by Sudhir Srivastava : 112004626
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