"पुराने ख़यालात की लड़की"
थोड़े पुराने ख़्यालात की लड़की हूँ,
लबों पे हया, निगाहों में नफ़ासत रखती हूँ।
जहाँ लोग मोहब्बत को खेल समझते हैं,
मैं अब भी मोहब्बत को इबादत रखती हूँ।
ज़माना बदले तो बदले, मैं नहीं बदलती,
वफ़ा को अब भी अपनी आदत रखती हूँ।
झूठे वक़्तों में भी सच्चाई से वाबस्तह हूँ,
मैं हर एहसास में सादगी की इनायत रखती हूँ।
Kirti Kashyap "एक शायरा"✍️