"तेरे ज़िक्र की हवा"
तेरे ज़िक्र की हवा जब बोसा दे गई गालों को,
मरहम-सा लगा गई, दिल के मलालों को।
तेरी याद ने फिर दिल की स्याही भिगो दी,
लिखते-लिखते मैं छू गई ख़यालों को।
न तुमने कुछ कहा, न मैंने कुछ सुना,
पर ख़ामोशी ने जोड़ा दो सवालों को।
हर ख्वाब तेरा देख के सोचा कुछ कह दूँ,
पर लफ़्ज़ रोक लेते हैं अहवालों को।
कभी-कभी हवा कुछ राज़ कह जाती है,
जैसे कोई पढ़ ले दिल के रिसालों को।
“कीर्ति” ने फिर सजा दिए कुछ टूटे अल्फ़ाज़,
जिसमें छुपा लिया सब हाल-ए-दिलवालों को।
Kirti Kashyap"एक शायरा"✍️
बोसा = चुम्बन
मलालों = दुःख, रंज, पश्चाताप
अहवालों = हालात, दिल की स्थिति
रिसालों = किताबें या पन्ने
हाल-ए-दिलवालों = दिलवालों की कहानी