चांद मुझें एक बात बता तू क्यों इतना चमक रहा ?
क्या खबर तुझे मिल गई है जिसकी दुआ मै मांगता हूं ।
पता नहीं है तुझको तो मै फोर्स उसको कहता हूं ।
दुआ वहीं है दोस्त जो मै मांग रहा हूं रब से ।
क्या वहीं सुनाने आया है जो सुनना चाहता हूं कब से ?
एक वक्त ठहर चला जाएगा क्या तू मुझे बता पायेगा ?
अब वह खबर तू सुनाएगा या और मुझे तड़फायेगा?
वह प्यार बड़ा अनमोल है मेरा ज्ञान भी उसके सामने गोल है ।
उस प्रेम को देखकर लगता है बारे बड़े प्रेमियों के प्रेम मै भी झोल है।
वो तालाब नहीं समंदर है वो भी मीठे पानी का
पावन उस प्रेम के समक्ष मान भी टूट जाए अभिमानी का ।
बादलों के पीछे छुपकर तू क्या दिखाना चाहता है ।
या इंतजार नहीं कर पा रहा मुझे जल्दी बताना चाहता है ।
तारो को पास मै बिठाकर उनको कहानी सुना रहा ।
या अपने गुरु से मिलकर उनको ये दृश्य दिखा रहा ।
साज संवर कर आया क्या मुझसे मिलने आएगा ।
या उम्मीद मुझमें जगाकर तू उनसे मिलने जाएगा ।
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