"ऐ दिल...
क्यों इतना संभल-संभल के धड़कता है,
जैसे किसी टूटे ख़्वाब की आहट से भी डरता है।
कभी किसी को महसूस करने की ख्वाहिश करता है,
फिर खुद ही ख़ामोशी में सिमट जाता है।
तू थक गया है शायद,
हर बार हंसकर दर्द छुपाने से।
पर देख, मैं यहीं हूँ…
तेरे साथ, तेरे बहाने से।
चल, आज कुछ नहीं सोचते,
ना बीते कल, ना आने वाले पल…
बस एक पल को चैन से सांस लेते हैं,
थोड़ा रो लेते हैं… और फिर मुस्कुरा लेते हैं।
चल, अब ज़ख्मों को कहानी बना लेते हैं,
और आँसुओं को स्याही…
क्योंकि कुछ दर्द लिखे जाएं,
तो सुकून बन जाते हैं — खुदाही।"
Kirti Kashyap"एक शायरा✍️