Hindi Quote in Motivational by Ranjeev Kumar Jha

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जीवन का अंतिम लेखा-जोखा!
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मनुष्य चाहे कितना भी ऊँचा क्यों न उड़ ले, अंततः उसे धरती की गोद में ही लौटना पड़ता है। धन, वैभव, शोहरत—सब जीवन के मेले के खिलौने हैं। मन बहलाते हैं, किंतु सत्य से दूर रखते हैं। जब साँसों की डोर ढीली होने लगती है और शरीर शैया पर पड़ा अंतिम गीत गा रहा होता है, तब ही ज्ञात होता है कि हमने जिन चमकते सिक्कों को अमृत समझा, वे तो रेत के कण थे—मुट्ठी कसते ही फिसल गए।

धन से आप सेवक ख़रीद सकते हैं, पर पीड़ा का बोझ कोई और नहीं ढो सकता। सोने के महल में रहिए या मिट्टी की कुटिया में—अकेलापन दोनों जगह समान है। तीन सौ की घड़ी हो या तीन लाख की, समय का प्रवाह तो वही एक निष्ठुर नदी है, जो किसी की प्रतीक्षा नहीं करती।

अस्पताल, जेल और श्मशान—ये तीन ही स्थान जीवन के असली अध्यापक हैं। अस्पताल कहता है—"स्वास्थ्य ही वास्तविक धन है।" जेल समझाती है—"स्वतंत्रता से बढ़कर कोई वरदान नहीं।" और श्मशान तो निर्विकार होकर पुकारता है—"देखो, अंत में सब कुछ शून्य है।"

हम जिस भूमि पर आज चलते हैं, कल उस पर कोई और चलेगा। जिस नाम से आज दुनिया गूँज रही है, कल वही नाम स्मृति की धूल में खो जाएगा। तब प्रश्न उठता है—क्या सचमुच जीवन का ध्येय केवल संपत्ति जोड़ना है? या फिर आत्मा को निर्मल करना ही उसकी असली कमाई है?

ऋषियों ने कहा है—"सुख वस्तुओं में नहीं, संतोष में है।" जो प्रेम आपने बाँटा, जो सत्य आपने जिया, वही आपकी विरासत है। बच्चों को केवल दौलत का गणित न सिखाएँ, उन्हें जीवन का दर्शन सिखाएँ—कि वस्तुओं की कीमत नहीं, उनके मूल्य को पहचानो।

जीवन एक उधार की साँस है। इसे व्यर्थ के मोह और छल में क्यों गँवाना? प्रेम कीजिए, क्षमा कीजिए, विनम्र रहिए। यही वह पूँजी है जो मृत्यु के पार भी आत्मा के साथ जाती है।

धन की गिनती से ऊपर उठकर जो व्यक्ति आत्मा का लेखा-जोखा कर लेता है, वही जान जाता है—जीवन का असली व्यापार प्रेम और करुणा में है। बाकी सब बाज़ार के हिसाब हैं, जो मरण के क्षण मिट्टी में मिल जाते हैं।
आर के भोपाल

Hindi Motivational by Ranjeev Kumar Jha : 111999970
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