मुश्किलों की राह 🌑
मुश्किलें आती हैं जीवन में बार–बार,
कभी आँधी बनकर, कभी तूफ़ान की पुकार।
राह में काँटे बिखरे, अंधेरा घना छाया,
फिर भी मन ने उम्मीद का दीप जलाया।
पथरीली डगर पर कदम डगमगाते हैं,
आँखों के सपने आँसुओं में बह जाते हैं।
पर वही तो इंसान की असली पहचान है,
जो गिरकर भी उठे—यही जीवन की जान है।
मुश्किलें रोकें, पर हारना नहीं,
घने बादलों में भी तारों को छुपाना नहीं।
हर अंधकार के पीछे भोर छिपी रहती है,
हर आँसू के पीछे मुस्कान खिली रहती है।
तो मत डर, जब मुश्किलें घेरे तुझको,
ये ही बनाएँगी मज़बूत कल का तुझको।
पत्थरों पर चलकर ही नदियाँ रास्ता बनाती हैं,
मुश्किलें ही जीत की सीढ़ियाँ कहलाती हैं।