🌅 सुप्रभात
जब सूरज ने पहली किरण बिखेरी,
धरती ने मुस्कान का आँचल ओढ़ा।
हवा ने कहा – “जागो मानव!”,
आज का दिन नया इतिहास जोड़ेगा।
सुप्रभात केवल अभिवादन नहीं है,
ये तो आत्मा से आत्मा का मिलन है।
जहाँ हाथ जुड़ते हैं और दिल मिलते हैं,
वहाँ सरहदें भी मिट जाती हैं।
एक किरण भारत में हँसती है,
दूसरी अफ्रीका में नाचती है।
तीसरी यूरोप में गीत सुनाती,
चौथी अमेरिका में सपने जगाती।
ये सूरज सबका है, ये सुबह सबकी है,
ना धर्म, ना जाति, ना कोई दीवार।
सिर्फ उजाला है, सिर्फ जीवन का उपहार,
प्रेम और आशा का अनंत संचार।
तो आओ – इस सुबह हम सब मिलकर प्रण लें,
“नफ़रत नहीं, केवल प्रेम चुनें।
ज्ञान बाँटें, मुस्कान दें,
धरती को स्वर्ग बनाने का संकल्प लें।”
Writer -
Dharmendra Kumar