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बंसी की मधुर तान है, कान्हा की पहचान है,
नंद के लाल के आने से, जग सारा मगन है।
माखन चुराने वाले, सबके मन को भाते,
जन्माष्टमी के पावन दिन, कान्हा घर-घर आते।
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राधा के बिना अधूरे हैं, ये कान्हा प्यारे,
प्रेम और भक्ति से सजते हैं, उनके सारे द्वारे।
जय हो नटखट गोपाल की, जय हो वृंदावन के राजा,
हर दिल में बसते हो तुम, कान्हा मेरे साजा।
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kajal Thakur 😊