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"तारा"
तारा जो मृत्यु से पार ले जाती है,
वही है तारा — जीवन की सच्ची परिभाषा।
रहते सुखी ले मृत्यु की कला,
यही सिखाती है तारा।
मोह-माया, भ्रम में न फँस,
चेतना से उठ, भीतर की आँखें खोल।
सत्य का दीप जला, अंधकार से लड़,
यही कहती है तारा — मत भूल।
भवसागर की तरंगों में डूब न जाना,
संघर्ष में भी शांति का स्वर पाना।
हर दुख में एक सीख है छुपी,
तारा यही रहस्य बतलाना।
मन के अंदर जो प्रकाश जगे,
वही तारा की ज्योति बने।
सत्य, प्रेम, और करुणा का पथ,
उसी पर चलना — यही तारा का रथ।