कही अमीर भी दुखी तो कहीं गरीब भी सुखी है
कहीं एक बेटी का पिता भी सुखी हैं तो
कहीं चार बेटों का पिता भी दुखी हैं
कहीं सगा भी दानव हैं, और
कहीं पराया भी श्रवण हैं।
कहीं बहु भी बेटी हैं, कहीं बेटी भी बोझ हैं।
कहीं बहु को नाजों से रखा जाता हैं, तो
कहीं बहु को जिंदा जलाया जाता हैं
किसी को छोटी से खुशी भी खुश कर जाती हैं,
किसी को छोटा सा गम भी तोड़ जाता हैं।
कहीं सीरत को संवारा जाता हैं तो
कहीं सूरत को संवारने पर जोर हैं।
कहीं खुली हवाओं में रहने की ख्वाहिश हैं
तो कहीं बड़े शहरों में बसने की होड़ हैं।
कहीं मेहनत से सफल होने की खुमारी हैं
तो कहीं पैसे की धौंस दिखाई जा रही हैं।
किसी की महलों में जिंदगी कट रही हैं, और
कोई झोंपड़ी में भी जिंदगी जी रहा हैं।
कहीं कोई ac में बैठा भी रो रहा हैं और
कहीं कोई फुटपाथ पर बेपरवाह नंगे पैर घूम रहा हैं।