संत कबीरदास--
रामानन्द जी कबीरदास जी के गुरू थे। एक बार बादशाह सिकंदर लोदी
ने रामानन्द जी को बुलवाया और करिश्मा दिखाने के लिए कहा। मना करने पर उनका सिर धड़ से अलग कर दिया। जानकारी होने पर कबीरदास जी आए और ईश्वर को याद करके गुरुदेव को बुलाया। रामानन्द जी का सिर धड़ से जुड़ गया। यह थी कबीरदास जी पर भगवान की कृपा। कृपा आप पर भी हो सकती है। नैशपीठ में आप आइए और अपने बच्चों को भी भेजिए। आपका शुभेच्छु, गणेश तिवारी पीठाधीश्वर नैशपीठ ।