11 मार्च 🚩🚩🚩 (बलिदान दिन)
देश धरम पर मिटने वाला, शेर शिवा का छावा था।
महा पराक्रमी परम प्रतापी, एक ही शंभू राजा था॥
तेजपुंज तेजस्वी आंखे, निकल गयी पर झुका नहीं।
हाथ कटे तो क्या हुआ, सत्कर्म कभी तो छूटा नहीं॥
जिव्हा कटी खून बहाया, धरम का सौदा किया नहीं।
शिवाजी का ही बेटा था वह, गलत राह पर चला नहीं॥
वर्ष तीन सौ बीत गये अब, शंभू के बलिदान को।
कौन भुला सकता है उनकी, अनुपम यश गाथा को॥
छत्रपति संभाजी महाराज
शौर्य की ज्वाला, साहस की गाथा,
धर्म के रक्षक, छत्रपति संभाजी था।
औरंगजेब की क्रूरता से, न डिगे वो कभी,
स्वराज के लिए, दे दी जान अपनी सभी।
11 मार्च का दिन, इतिहास में काला,
वीर संभाजी को, यमराज ने था मारा।
अत्याचारों से न झुके वो कभी,
धर्म की रक्षा की, अपनी जान देकर सभी।
आज भी उनकी गाथा, गूंजती है यहाँ,
वीरता की मिसाल, है वो सदा।
छत्रपति संभाजी महाराज, अमर हो गए,
देशभक्ति की ज्योति, सदा जलाए गए।
छत्रपति संभाजी महाराज को शत शत नमन